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मास्टर युद्ध के राजा को दर्शन देती हैं, 6 भागों में से भाग 3

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ठीक है, मैं आपको अंतिम बार कुछ कहने का अवसर दूँगी। आप क्या कहना चाहोगे? और कुछ? नहीं? अच्छा। कम-से-कम आपमें अभी भी थोड़ी समझ बाकी है। आप मुझे सच-सच बताओ: क्या आप स्वयं को अच्छा मानते हो? मेरे विरुद्ध अपने या अपने अधीनस्थों के किसी भी कृत्य के बाद, क्या आप स्वयं को अच्छा मानने योग्य समझते हो? आपको लगता है कि आप अच्छे हो? नहीं? तो आप अपने बारे में क्या कहोगे? मैं आपको सोचने के लिए कुछ क्षण देती हूँ। आपने कहा, “अच्छा नहीं”? आपने कहा कि आप अच्छे नहीं हो। ठीक है। आप ठीक हो। स्वयं को अच्छा बनाने के लिए कुछ करने का प्रयास करो। तब मैं आपकी सज़ा या कारावास की अवधि पर विचार करूँगी। मैं वचन देती हूँ। यदि आप सच्चे मन से पश्चाताप करोगे और संसार को बेहतर बनाने में सहायता करोगे, तो मैं इसे आपके लिए बेहतर कर दूँगी। अब और युद्ध नहीं। केवल शांति, सुख। और जो लोग व्यक्तिगत रूप से बुरे हैं, वे या तो आपकी सज़ा पाएँगे, या जागृत और प्रबुद्ध होकर अच्छे कर्म करेंगे, परमेश्वर से प्रार्थना करेंगे और, जब तक मैं यहाँ हूँ, इसी जीवन में ही मुक्ति पा सकेंगे।

अब अलविदा। आप शांत और सौम्य रहो, अच्छे बनो, पश्चाताप करो और क्षमा तथा उद्धार के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर से प्रार्थना करते रहो। अलविदा। परमेश्वर का धन्यवाद करें कि उन्होंने मुझे आपसे बात करने की अनुमति भी दी। मैं आपके लिए कुछ आशीर्वाद और प्रेम भेजती हूँ, आशा है, इससे आप अधिक जागृत और उन लोगों की पीड़ा के प्रति अधिक संवेदनशील बनोगे, जो उस नकारात्मक शक्ति के नियंत्रण और विषैले तंत्र के कारण पीड़ित हैं जिसने बहुत पहले इस संसार पर कब्ज़ा कर इसे चुरा लिया था। परमेश्वर का धन्यवाद। आमीन। वे सब पश्चाताप करें और जागृत हों।

आपको शांति के राजा का भी हृदय से आभारी होना चाहिए। वह शांति के राजा हैं, पर मेरी थोड़ी साँस बचाने के लिए चाहते हैं कि मैं उन्हें केवल शांति राजा कहूँ; मैं थक भी गई हूँ। आप उन्हें धन्यवाद दो कि उन्होंने मुझसे संपर्क भी किया, ताकि उनके आग्रह पर मैं आपसे बात करूँ, क्योंकि वह अच्छे बालक रहे हैं और मेरे लिए बहुत-से अच्छे कार्य करते हैं। इसलिए मैंने उन्हें आपको मुझसे संपर्क कराने का अवसर दिया। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होगा, जब तक कोई अत्यावश्यक बात न हो या आपने सचमुच कोई ऐसा अच्छा कार्य न किया हो, जिसे मेरी स्वीकृति मिले और जिससे आपकी सज़ा कम हो सके। वह कार्य बहुत बड़ा, सचमुच महान और इस ग्रह के सभी मनुष्यों तथा अन्य सभी प्राणियों के लिए वास्तव में लाभकारी होना चाहिए। अभी के लिए अलविदा। ओह, मेरा मतलब शांति के राजा से है। आपका धन्यवाद, और अभी के लिए अलविदा। परमेश्वर कृपा करें।

ओह, वैसे एक महत्त्वपूर्ण बात है जो मैं आपको बताना चाहती हूँ। ध्यान से सुनो और इसे उसी के अनुसार करो। दो देश हैं, वास्तव में दो द्वीप, जो देश हैं। एक ताइवान (फ़ॉर्मोसा) है, दूसरा यूनाइटेड किंगडम। उन्हें बहुत गंभीर और धौंसपूर्ण धमकियाँ मिली हैं, क्योंकि आपके कुछ अधीनस्थों ने अन्य देशों के नेताओं को इन दोनों राष्ट्रों की शांति और सौहार्द को भंग करने के लिए उकसाया या धमकाया है। परमेश्वर के आदेश से वे मेरे व्यक्तिगत संरक्षण में हैं। आपका कोई भी अधीनस्थ जो युद्धोन्मादी रवैया अपनाए या वर्षों से गंभीर धमकियाँ झेल रहे इन दोनों देशों को हानि पहुँचाने का प्रयास करे—या जो आपके अधीनस्थों की बात मानकर इन्हें हानि पहुँचाए—वह ऊपर से भले ही जीत जाए, पर इन दोनों द्वीपों के विरुद्ध ऐसे युद्ध में भाग लेने वाला हर व्यक्ति सीधे मेरे और परमेश्वर के आदेश के विरुद्ध होगा। इसलिए आपके आदेश का पालन करने वाले या लोभ और क्रूरता से ऐसा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सौ से अधिक पीढ़ियाँ सदा नरक में रहेंगी, या कम-से-कम भौतिक व्यवस्था में पूर्णतः नष्ट कर दी जाएँगी। उनकी ख्याति, उनके नाम, उनकी संपत्ति, उनका सुख और उनके संबंध निरंतर अशांत, बाधित या नष्ट होते रहेंगे। इसलिए आप अपने अधीनस्थों को सावधान कर दो। उन्हें यह रोकना होगा, अन्यथा वे पृथ्वी पर अनंत दंड और उसके बाद सदा के लिए नरक भोगेंगे। आप जानते हो कि मैं सच कह रही हूँ। आप मुझे जानते हो। इसलिए यह अंतिम चेतावनी है।

खैर, यूनाइटेड किंगडम, विशेषकर इंग्लैंड ने मुझे उस समय शरण दी, जब मैं एक युद्ध-शरणार्थी जैसी थी। उस समय, अभी शरणार्थी नहीं थे, पर युद्ध समाप्त होने के बाद, मैं एक शरणार्थी बन गई। उन्होंने मुझे अपने देश का पूरा संरक्षण दिया—मानो मेरा जन्म और पालन-पोषण इंग्लैंड में ही हुआ हो और इंग्लैंड के सिवा मेरे पास जाने के लिए कोई स्थान न हो। उन्होंने मुझे वह संरक्षण दिया। यह है इंग्लैंड। इसलिए मैं उसे अपना देश मानती हूँ। अपने जन्म-देश के बारे में, भी मुझे अब तक निश्चित नहीं कि मैं वहाँ लौट पाऊँगी या नहीं।

इंटरनेट पर अब भी बहुत-सी नकारात्मक धमकियाँ और चर्चाएँ जारी हैं, साथ ही उन समूहों और व्यक्तियों द्वारा अन्याय तथा हिंसा भी हो रही है, जो कानून से बचकर और असहाय लोगों को भ्रमित करके वास्तविक अपराधियों जैसा जीवन जीते और आचरण करते हैं, इत्यादि... और नकली आस्था का आवरण ओढ़े इन अपराधी गिरोहों के पीड़ित अपनी तथा प्रियजनों की जान के भय से एक शब्द कहने का साहस नहीं करते, क्योंकि वे कमज़ोर हैं और प्रमाणों का उपयोग करना नहीं जानते!!! संसार के कुछ भागों में आज भी ऐसा समय है—यदि आप ईसाई हैं, मुसलमान नहीं, तो आपको मृत्युदंड दे दिया जाएगा। यदि आप एक महिला हैं, तो शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकतीं, इत्यादि।

वहाँ (ओलाक (वियतनाम) जाने का कोई अच्छा अवसर या सुरक्षित मार्ग मुझे नहीं दिखता, यद्यपि मुझे विश्वास है कि वर्तमान सरकार बहुत अच्छा कार्य कर रही है और अपनी क्षमता के अनुसार लोगों की भरपूर देखभाल कर रही है। परमेश्वर, आपका धन्यवाद। पर मुझे संसार की देखभाल करनी है। मैं ऐसी जगह नहीं जाती जहाँ मेरा जीवन या परमेश्वर के लिए कार्य करने की मेरी स्वतंत्रता संकट में पड़े। इस असंतुलित संसार में बुरे लोग निर्बाध फलते-फूलते दिखाई देते हैं; जबकि अच्छे लोग शायद कम भाग्यशाली हों! विशेषकर वे, जो सच में परमेश्वर और मानवता के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं! हम अभी भी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं; कुछ अन्य देशों में तो और भी कठोर प्रतिबंध हैं। मैं उनका उल्लेख नहीं करना चाहती। आप इसे जानते हो।

और दूसरा है ताइवान (फ़ॉर्मोसा)। ताइवान (फ़ॉर्मोसा) वह पहला देश था जहाँ मैं अपने मिशन के साथ पहुँची। उन्होंने खुले हृदय से मेरा स्वागत किया और परमेश्वर की शिक्षाएँ तथा सत्य सर्वत्र फैलाने में मेरी सहायता की। इसलिए, मैं उनकी रक्षा करती हूँ। निस्संदेह, भीतर या बाहर के वे बुरे लोग जो अपने कर्मों से परमेश्वर के विरुद्ध जाते हैं, या इतने विषाक्त हैं कि मेरी शिक्षाओं का पालन नहीं करते—उन्हें अपने व्यक्तिगत कर्मफल और अपने परिवार, कुल, पड़ोसियों या संपर्क में आने वाले अन्य लोगों से संबंधित सभी बुरे कर्मों का फल भोगना होगा। उन्हें अपने रचे हुए बुरे कर्मों का, फल भोगना होगा। मैं फिर भी उनकी सहायता करने का प्रयास करती हूँ, लेकिन उन्हें अपनी सज़ा भुगतनी ही होगी।

पर ताइवान (फ़ॉर्मोसा) के अन्य लोग अच्छे हैं। संभव है, वे मेरा अनुसरण न करते हों, लेकिन वे सभी मुझे जानते और मेरा सम्मान करते हैं। जब भी मैं ताइवान (फ़ॉर्मोसा) लौटती हूँ, वे प्रेमपूर्वक मेरा स्वागत करते हैं। मैं पूरे ताइवान (फ़ॉर्मोसा) को नहीं जानती, पर कम-से-कम जिस प्रांत और आसपास के क्षेत्रों में मैं लौटी हूँ, वहाँ ऐसे ही है। यदि संयोग से, वे मुझे देख लेते हैं, तो सभी मुझे पहचानते हैं और बहुत प्रेम तथा सम्मान देते हैं। निस्संदेह, मैं भी हृदय से, और खुले रूप में उनसे प्रेम और उनका सम्मान करती हूँ।

इसलिए इन दोनों देशों को हाथ मत लगाना। आप अपने अधीनस्थों से कहो, “नशीले पदार्थों या शैतानी प्रभाव में पहले से मदहोश अन्य बुरे नेताओं को मत उकसाओ। उनसे कहो कि इन दोनों देशों को हाथ न लगाएँ। क्योंकि उन्हें और उनसे जुड़ी हर चीज़ को सदा के लिए बहुत बड़ा दंड भोगना पड़ेगा। और मैं पूरी गंभीरता से कह रही हूँ। सामान्यतः मैं यह बात खुले रूप में नहीं कहना चाहती थी, लेकिन आपने मेरे और मेरे कार्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ा और मेरे शिष्यों को हानि पहुँचाई, विशेषकर उन्हें जो सुप्रीम मास्टर टेलीविज़न के लिए कार्य करते हैं, जो सभी अच्छी बातें प्रसारित करता है और लोगों को अच्छा बनने की याद दिलाता है, ताकि वे स्वतंत्र होकर मुक्ति पा सकें— क्योंकि आपने अपने अधीनस्थों को ऐसा करने दिया, या स्वयं भी ऐसा किया। वैसे भी, आप सब इसमें साथ हो। इसलिए अब मुझे आपको चेताना होगा— सावधान रहो। ऐसा नहीं कि नरक के बाहर अब भी आपके कुछ हठी और शक्तिशाली अधीनस्थ हैं, इसलिए आप जो चाहो कर सकते हो; अच्छाई की हमेशा विजय होगी। दुष्कर्मी हमेशा विनाश को प्राप्त होंगे, दंडित होंगे या सदा के लिए नरक में कैद रहेंगे।

उदाहरण के लिए, जब शाक्यमुनि बुद्ध अभी भी जीवित थे, तब लोगों ने अनेक बार और अलग-अलग तरीकों से विश्व-वंदनीय प्रभु को हानि पहुँचाने का प्रयास किया। उन्होंने उनकी हत्या तक करनी चाही, पर केवल उनके पैर का अँगूठा घायल कर सके, इत्यादि। और परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह को इतनी क्रूरता, अमानवीयता और शैतानी ढंग से मार डाला गया। देखो, उनके साथ क्या हुआ? सदियों पर सदियाँ बीतती चली गईं, सदियाँ बीतती चली गयी, और वे निरंतर अधिक पूजनीय, अधिक प्रिय और अधिक प्रसिद्ध होते गए, सदा के लिए। आपने वह देखा? अच्छाई की हमेशा विजय होगी। केवल भौतिक रूप में नहीं, बल्कि आत्मिक रूप से और मनुष्यों के हृदय में भी। वे भले ही नशे के प्रभाव में इतने डूबे हों, फिर भी किसी तरह जानते हैं कि अच्छाई क्या है और उन्हें किसकी पूजा तथा किससे प्रेम करना चाहिए।

मैंने केवल दो उदाहरण दिए हैं, लेकिन आप देखते हैं, अनेक गुरुओं को शारीरिक, मानसिक या स्वतंत्रता के स्तर पर हानि पहुँचाई गई है। शैतानों ने उनके साथ जो कुछ भी करने का प्रयास किया, वह हमेशा विफल रहा। वे मानवता के हृदय में सदा-सदा के लिए स्मरणीय, सम्मानित और प्रिय बन गए। इसलिए, आप जैसे युद्धप्रिय लोग कुछ वर्षों तक कुछ लड़ाइयाँ जीतते रहे हो, लेकिन आपकी और आपके प्रभाव में आए नेताओं की किसी को परवाह नहीं। वे अंततः दयनीय मृत्यु मरेंगे। कोई उनसे प्रेम नहीं करता। और इतिहास सदा उन निकृष्टतम शैतानी कृत्यों को दर्ज करेगा, जो उन्होंने आपके और आपके साथ काम करने वाले दुष्टात्माओं के कारण किए।

संसार के उन सभी गुरुओं के नाम गिनो जिन्हें सूली पर चढ़ाया गया, जिनकी हत्या हुई, या जो कारागार अथवा सार्वजनिक रूप से विष दिए जाने से मरे। उनके साथ क्या हुआ? वे केवल उनके शरीर को हानि पहुँचा सके, उनकी पवित्रता को नहीं। लोग सदा उनकी पूजा करते हैं। उन सभी के नाम गिनो। उदाहरण के लिए, सभी सिख गुरु और प्रभु ईसा मसीह के सभी शिष्य... बुद्ध के निर्वाण के बाद आए सभी गुरुओं के नाम आज भी लोग जानते हैं और उनकी शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं। और जब बोधिधर्म जीवित थे, तब भी अधिक लोगों ने उनका अनुसरण नहीं किया। पर उनकी संक्षिप्त-सी शिक्षा भी, ब्रह्मांड की स्मृति, इतिहास और सही-गलत समझने वाले लोगों के हृदयों में अंकित है। सभी जैन गुरु और ऐसे अनेक अन्य गुरु, जिनके नाम कई पुस्तकों में भी पूरे नहीं लिखे जा सकते। मनुष्यों ने उनके साथ दयापूर्ण व्यवहार किया, फिर भी वे ब्रह्मांड और प्रत्येक मानव-आत्मा के हृदय में सदा जीवित हैं।

इसलिए आप लोग, बुरे लोग, जो लगभग दस हज़ार वर्ष पहले इस ग्रह को चुराने वाली नकारात्मक शक्ति के लिए काम करते हो, लौट आओ। लौट आओ। प्रेम के मार्ग पर चलो। तब शायद आपको क्षमा मिल जाए। शायद आप नरक और अंतिम न्याय से बच सको। शायद आप स्वतंत्र और अपराधबोध से मुक्त होकर चल सको। कम-से-कम आप स्वयं को क्षमा करके सुखी हो सकोगे, परमेश्वर के नाम पर, उनकी कृपा से आशीष पाओ। अन्यथा, आपके लिए न जीवन है, न कोई विकल्प। आपकी अंतरात्मा आपको भीतर से खा जाएगी। आपके कर्म नरक में इतने बढ़ जाएँगे कि उन्हें भस्म होने में अनंत काल लग सकता है। इसीलिए आपको सदा नरक में रहना होगा, जब तक आपके सभी पाप जलकर मिट न जाएँ और आप पूर्णतः शुद्ध न हो जाओ। इसमें अनंत काल लगता है, या शायद कभी न हो। ऐसा कभी नहीं होगा, यदि आप जागृत नहीं होते, पश्चाताप नहीं करते, क्षमा नहीं माँगते और अच्छाई के मार्ग पर चलकर, दूसरों की सहायता करके तथा किसी को हानि न पहुँचाकर अपने पापों का प्रायश्चित नहीं करते।

अभी के लिए इतना ही। और यदि कोई बात सचमुच महत्त्वपूर्ण और अत्यावश्यक न हो, तो मुझसे बात मत करना। यदि इस ग्रह पर शांति लौट आती है, तो शायद, शायद मैं आपके पापों की सज़ा पर विचार करूँगी और तब शायद आपसे बात करूँगी। अब मुझे परम शक्तिशाली ट्रिनिटी के साथ बैठक करनी है। मुझे जाना होगा। आप जो भी कहना चाहते हो, उसे अभी अपने पास रखो। जब आपके कर्म सिद्ध कर दें कि आपने अपने पापों का प्रायश्चित करने का प्रयास किया है, तब मुझे बताना।

Photo Caption: “निर्जन वन में ईश्वर किसी भी चीज़ को विशेष बना देते हैं”

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सभी भाग (3/6)
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मास्टर और शिष्यों के बीच
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मास्टर और शिष्यों के बीच
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