खोज
हिन्दी
  • English
  • 正體中文
  • 简体中文
  • Deutsch
  • Español
  • Français
  • Magyar
  • 日本語
  • 한국어
  • Монгол хэл
  • Âu Lạc
  • български
  • Bahasa Melayu
  • فارسی
  • Português
  • Română
  • Bahasa Indonesia
  • ไทย
  • العربية
  • Čeština
  • ਪੰਜਾਬੀ
  • Русский
  • తెలుగు లిపి
  • हिन्दी
  • Polski
  • Italiano
  • Wikang Tagalog
  • Українська Мова
  • अन्य
  • English
  • 正體中文
  • 简体中文
  • Deutsch
  • Español
  • Français
  • Magyar
  • 日本語
  • 한국어
  • Монгол хэл
  • Âu Lạc
  • български
  • Bahasa Melayu
  • فارسی
  • Português
  • Română
  • Bahasa Indonesia
  • ไทย
  • العربية
  • Čeština
  • ਪੰਜਾਬੀ
  • Русский
  • తెలుగు లిపి
  • हिन्दी
  • Polski
  • Italiano
  • Wikang Tagalog
  • Українська Мова
  • अन्य
शीर्षक
प्रतिलिपि
आगे
 

विश्व युद्ध की शीघ्र समाप्ति के लिए हमें किसका आभार मानना चाइए, 3 का भाग 2

विवरण
डाउनलोड Docx
और पढो
तो बातचीत कुछ इस तरह हुई: स्वर्ग वास्तव में नहीं चाहता कि हम (पुनर्मिलित ट्रिनिटी अत्यंत शक्तिशाली) युद्ध रोकें, क्योंकि अरबों, खरबों, असंख्य जीव न जाने कब से रो रहे हैं- क्योंकि हम नहीं जानते कब से- कसाईखाने में, शिकार के मैदान में, समुद्र में जहाँ केवल शांति और दया थी। इसलिए, ईश्वर उनकी विनती को अनसुना नहीं कर सकते और उन्हें उन मनुष्यों के हाथों अन्यायपूर्ण ढंग से पीड़ित नहीं होने दे सकते जिनके पास दुनिया में किसी भी प्राणी को बिना किसी की अनुमति मांगे मारने की सारी शक्ति, सारे उपकरण, सारा समय और सारे आविष्कार मौजूद हैं। भगवान से अनुमति मांगने की बात तो छोड़ ही दीजिए, क्योंकि अगर वे भगवान से अनुमति मांगेंगे तो भगवान कहेंगे "नहीं"। लेकिन, ज़ाहिर है, अगर भगवान मना भी कर दें, तो कितने लोग उनकी की बात सुनेंगे? इसलिए वे पापपूर्ण मार्ग, बर्बर मार्ग पर चलते रहते हैं।

इसलिए आप इस भौतिक दुनिया के विनियमन पर शासन करने वाले माया के राजा को भी दोष नहीं दे सकते। कल्पना कीजिए कि आप माया के राजा हैं, और फिर लोग आपके परिवेश या आपके घर में घुसकर आपके आस-पास, आपके परिवेश में मौजूद हर चीज को मार डालते हैं। और आप उन्हें इस तरह रोते-बिलखते और पीड़ा सहते हुए यूं ही नहीं देख सकते। कल्पना कीजिए कि यदि आप माया के राजा होते, तो क्या आप इसे स्वीकार करते? नही, बिल्कुल नही। तो इस तरह हमें उन सभी अत्याचारों का प्रायश्चित करना होगा जो हमने अनादिकाल से किए हैं।

बेशक, आप सभी जानते हैं कि इस भौतिक जगत में हर चीज की एक कीमत होती है। बेशक, इस अचानक और तेजी से समाप्त हुए विश्व युद्ध के रुकने या जीत के लिए एक कीमत चुकानी पड़ी। लेकिन यह सब इसके लायक था। यह सब इसके लायक था। बस यह, मुझे इस बात की चिंता है कि अगर अगली बार ऐसा हुआ, तो मुझे नहीं पता कि भगवान मुझे प्रायश्चित करने की अनुमति देंगे या नहीं, या फिर मेरे पास दोबारा विश्व युद्ध को रोकने की पर्याप्त क्षमता होगी भी या नहीं। यह एक बहुत बड़ा प्रयास है। यह अविश्वसनीय है। मेरे पास आपको बताने के लिए शब्द नहीं हैं। इसलिए, कृपया स्वर्ग की शक्ति और ईश्वर की दया पर ही निर्भर न रहें, क्योंकि कभी-कभी आपदाएँ, युद्ध होना अपरिहार्य होता है। इसलिए कृपया अपनी जीवनशैली को एक सच्चे, नेक और गरिमामय इंसान के अनुरूप बदलें। इस दुनिया को बनाए रखने, अपनी और इस पर मौजूद सभी प्राणियों की रक्षा करने, और अपने बच्चों की रक्षा करने के लिए आप जो भी छोटे-छोटे प्रयास करते हैं, उनके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। कृपया अपने बच्चों को याद रखें। धन्यवाद।

अब हमें ईश्वर का धन्यवाद करना है, ट्रिनिटी का धन्यवाद करना है, परम शक्ति से परिपूर्ण संयुक्त ट्रिनिटी का धन्यवाद करना है। और फिर, निश्चित रूप से, हम शांति के राजा को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने इस पहलू के लिए मेरी टीम, मेरी स्वर्गीय टीम के साथ पूरी तरह से सहयोग किया। हम उन दिव्य टीम को भी धन्यवाद देते हैं जो पृथ्वी पर अवतरित हैं और ईश्वर की शांति योजना के अनुरूप अच्छा काम कर रहे हैं, भले ही यह हमेशा ऐसा न दिखे! हमें कई काम करने होंगे, सिर्फ युद्ध और शांति का ध्यान रखना ही काफी नहीं है। इसीलिए मैं काफी व्यस्त रहती हूँ। ब्रह्मांड को संतुलित, स्थिर रखने और कई ग्रहों को डगमगाने, कांपने या नष्ट होने के कगार पर आने से बचाने के लिए हमें बहुत कुछ करना पड़ता है। ठीक है, बहुत सी बातें मैं आपको नहीं बता सकती।

तो चर्चा काफी लंबी चली, लेकिन मुख्य बात यह थी कि स्वर्ग अब मनुष्यों की मदद करने में बहुत अनिच्छुक महसूस करता है क्योंकि वहाँ बहुत विलाप, रोना, दर्द और पीड़ा है, पशु-जन पर अत्याचार और कैद है, और शिशुओं की हत्या की जा रही है। प्रतिदिन दो लाख शिशुओं की हत्या कर दी जाती है। ओह, मेरे प्रभु; हर देश के कानून में मानवाधिकारों के बारे में बात करना। इसलिए सभी असहाय प्राणियों के, सभी विलाप, रोने, पीड़ा सहने, प्रार्थना करने और स्वर्ग के सभी निर्णयों और फैसलों के संदर्भ में, ईश्वर ने यह निर्णय लिया कि मुझे युद्ध को रोकने और शांति स्थापित करने में मदद नहीं करनी चाहिए - हाल ही में हुए युद्ध में, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, अस्तित्व और मनोवैज्ञानिक शांति को प्रभावित करता है।

लेकिन शांति के राजा ने मुझसे कहा, "लेकिन अगर आप शांति स्थापित करने में मदद नहीं करोगे, तो लोगों को बहुत कष्ट सहना पड़ेगा।" मैंने कहा, "मुझे पता है, मुझे पता है, मुझे पता है।" हमें मदद करनी होगी। इसलिए हम सबने भगवान से प्रार्थना की कि वह हमें दुनिया की मदद करने, युद्ध रोकने का एक और मौका दें, क्योंकि मैंने कहा, "अभी भी बहुत सी अच्छी आत्माएं हैं। वे दूसरों की, पशु-जन, जंगली पशु-जन की मदद करते हैं। फंसे हुए पशु-जन, विभिन्न तरीकों से असहाय पशु-जन, भले ही वे आध्यात्मिक रूप से झुकाव वाले न हों या वे ईश्वर के आध्यात्मिक प्रस्ताव के साथ तालमेल न रखते हों। अभी भी बहुत से अच्छे लोग हैं, इसलिए हमें उनकी मदद करनी होगी। हमें उनकी मदद करनी होगी। हमें मनुष्यों की मदद करनी होगी। और फिर हम आगे बढ़ते हुए मनुष्यों को सलाह देने और उन्हें किसी न किसी तरह से ज्ञान प्रदान करने का प्रयास करते हैं ताकि वे इन सभी हत्यारी मंशाओं को रोक सकें, या मेरा मतलब है, गैरईरादतन।" अंततः, स्वर्ग ने दया दिखाई।

लेकिन मुझे खुद भी अच्छा नहीं लगा क्योंकि अगर मैं इंसानों की मदद कर रही हूं और वे जानवरों और उनके बच्चों की हत्या करना जारी रखते हैं, तो यह वह नहीं है जिसे मैं वास्तव में एक पूर्ण जीत मानती हूं। लेकिन मुझे नहीं पता। क्या इसे करने का कोई और तरीका है? नहीं, फिलहाल तो नहीं। इसलिए मैं आप सभी से, आप सभी से जो अभी तक वीगन, परोपकार और प्रेमपूर्ण दयालुता के मूल्यवान साधन के प्रति जागृत नहीं हुए हैं, केवल यही विनती करती हूं। कृपया जाग जाओ। कृपया इसका उपयोग करें। यह आपके भीतर ही है। सभी मनुष्य मूल रूप से परोपकारी, बुद्धिमान, करुणामय और प्रेमपूर्ण होते हैं। कृपया इसकी अपनी आत्मा के, अपने हृदय के भीतर खोज करें। इसका जितना हो सके उतना उपयोग करें, खुद को बचाने के लिए, अपने बच्चों को बचाने के लिए, पशु-जन को बचाने के लिए, पर्यावरण को बचाने के लिए, उन सभी चीजों को बचाने के लिए जिनकी हमें आवश्यकता है - इस ग्रह को बचाएं। कृपया, कृपया, कृपया।

मैं तहे दिल से उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करती हूं जिन्होंने वीगन जीवन शैली अपना ली है और इस नेक मार्ग पर चल रहे हैं। और मैं आप सभी को अग्रिम धन्यवाद देती हूं जो आज या कुछ समय बाद परोपकार का मार्ग, वीगन जीवनशैली का मार्ग चुन रहे हैं; वह मार्ग आपका मार्ग है, आपकी करुणामयी प्रकृति का क्रियान्वयन है, प्रेम का क्रियान्वयन है। कृपया प्रेम को व्यवहार में और अधिक प्रकट करें। एक दूसरे से प्यार करो। अपने परिवार के सदस्यों के प्रति दयालु और विनम्र रहें। अपने कस्बे के लोगों और जानवरों के प्रति दयालु और विनम्र रहें, और उन सभी चीजों के प्रति भी जो भी- पेड़, जमीन, मिट्टी, पहाड़, जंगल, नदियाँ, महासागर। कृपया सभी के प्रति दयालु रहें, सभी की रक्षा करें, क्योंकि इसी तरह आप अपनी और अपने प्रियजनों की रक्षा कर सकते हैं। ईश्वर करे कि आप मेरी बात को और अधिक समझें और उन्हें व्यवहार में ला सकें। धन्यवाद, मेरे प्रभु। आप सभी का धन्यवाद, हे ईश्वर के बच्चों, जिन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा का उपयोग भलाई करने, दूसरों को लाभ पहुंचाने के लिए किया है, और बदले में आपको और आपके प्रियजनों को भी लाभ होगा। आमीन।

असल में, मैं कुछ और बड़ी खबरों का भी इंतजार कर रही थी, ताकि मैं आपको सब कुछ एक साथ बता सकूं, लेकिन अब मैं और इंतजार नहीं कर सकती। मुझे लगता है कि हम सभी को ईश्वर का, स्वर्ग की टीम का, शांति के राजा का और उन सभी राजाओं का धन्यवाद करना चाहिए जो मदद करते हैं अब तक हमें मिले उपहारों के लिए! मुझे खुशी है कि मेरे संगठन में मेरे साथ 10 अच्छे राजा हैं। इसलिए आप एक दूसरे का सम्मान करते हैं: आपको कभी पता नहीं चलता कि कौन किस चीज का बादशाह है, जैसे सुरक्षा का बादशाह, हिफाज़त का बादशाह, वगैरह... हे भगवान! मैं तो भूल ही गई, क्योंकि मैंने इसे लिखा ही नहीं था। शायद अगली बार मैं सभी नाम याद रखने की कोशिश करूँगी और फिर मैं आपको बताऊँगी, अगली बार जब भी मैं आपसे दोबारा बात कर पाऊँगी।

साथ ही, मैं इस बार इसलिए बात करना चाहती थी ताकि आपको बता सकूं कि मैं अभी भी पूरी दुनिया के लिए काम कर रही हूं। मैंने किसी को नहीं छोड़ा, यहाँ तक ​​कि नरक में पड़े लोगों को भी नहीं; मैं अब भी उनकी मदद करने की कोशिश कर रही हूं, जब भी और जहाँ भी मैं कर सकती हूं।

हम स्वर्गों, अनेक स्वर्गों, सर्वशक्तिमान ईश्वर और परम शक्ति से संपन्न पुनर्मिलित ट्रिनिटी के प्रति कृतज्ञ हुए बिना नहीं रह सकते। हम उनका आभार व्यक्त किए बिना नहीं रह सकते। यहाँ तक कि हर इंसान के छोटे से प्रयास के लिए भी और हर उस छोटी सी नेमत के लिए भी जो हमारी दुनिया में आती है— चाहे हम उसे देख पाएँ या न देख पाएँ! हमें आभारी होना चाहिए, और हमें अपने जीवन जीने के तरीके को ईश्वर की तरह दयालु और करुणामय बनाना चाहिए, क्योंकि हमें दूसरों को क्षमा करना है। हमें दूसरों का पालन-पोषण और उनकी रक्षा करनी होगी ताकि हम ईश्वर के आदर्शों और ईश्वर की इच्छा के अनुरूप चल सकें, ताकि हम स्वयं भी उसी प्रकार सुरक्षित और संरक्षित रह सकें जिस प्रकार हमने दूसरों को सुरक्षा और संरक्षण प्रदान किया है, और परोपकार या दूसरों के लिए कुछ भी अच्छा किया है।

हम वही काटते हैं जो हम बोते हैं। यह बिल्कुल सही है, भले ही इस समय स्वर्ग तथा ईश्वर तीसरे विश्व युद्ध के बारे में दयालु और उदार हो। लेकिन यह हमेशा के लिए नहीं हो सकता। हम बच नहीं सकते, सुरक्षित नहीं रह सकते, आशीर्वाद प्राप्त नहीं कर सकते, जीवित नहीं रह सकते, अपनी सभी जरूरतों का आनंद नहीं ले सकते, लेकिन साथ ही साथ दूसरों को, असहाय लोगों को, जैसे शिशुओं को, गर्भ में पल रहे भ्रूणों को, निर्दोष पशु-जन को नुकसान पहुंचाते रह सकते हैं - हम ऐसा नहीं कर सकते। हमें प्रेम और दयालुता का भाव रखना होगा, क्योंकि हम दूसरे प्राणियों से यही अपेक्षा करते हैं। और स्वर्ग से भी हम यही चाहते हैं। हमें इसे बनाना होगा। हमें इस गुण को अपनी आत्मा में, अपने हृदय में पोषित करना होगा, ताकि हम जहाँ भी जाएं, जहाँ भी रहें, वही गुण उत्पन्न कर सकें। जैसा बोओगे वैसा काटोगे।

आप सभी यह जानते हैं। काटे तो उसका फल भोगे। आप सभी यह जानते हैं। आप सभी कर्म के बारे में जानते हैं। चाहे आप बौद्ध न हों, चाहे आप ईसाई न हों, आप सभी जानते हैं, "जैसा बोओगे वैसा काटोगे।" मुझे बार-बार वही बात दोहराने की कोई जरूरत नहीं है। आप बुद्धिमान हैं। कृपया, आप वही बनें जो आप दूसरों को बनाना चाहते हैं। दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने साथ करवाना चाहते हैं। दूसरों को वह सब कुछ दें जो आप दे सकते हैं, ठीक उसी तरह जैसे आप खुद पाना चाहेंगे यदि आपको उन चीजों की, उन परिस्थितियों की, उस मदद की, उन सांत्वना भरे शब्दों की आवश्यकता होती। कृपया, कृपया और कृपया।

Photo Caption: "थोड़ी सी बर्फ़ आपके घर वापसी के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकी!"

फोटो डाउनलोड करें   

और देखें
सभी भाग (2/3)
1
मास्टर और शिष्यों के बीच
2026-05-02
1988 दृष्टिकोण
2
मास्टर और शिष्यों के बीच
2026-05-03
1463 दृष्टिकोण
3
मास्टर और शिष्यों के बीच
2026-05-04
1153 दृष्टिकोण
और देखें
नवीनतम वीडियो
उल्लेखनीय समाचार
2026-05-05
1489 दृष्टिकोण
शॉर्ट्स
2026-05-05
1 दृष्टिकोण
सौंदर्यवादी क्षेत्रों के बीच एक यात्रा
2026-05-05
409 दृष्टिकोण
मास्टर और शिष्यों के बीच
2026-05-05
607 दृष्टिकोण
उल्लेखनीय समाचार
2026-05-04
789 दृष्टिकोण
34:32
उल्लेखनीय समाचार
2026-05-04
1 दृष्टिकोण
ज्ञान की बातें
2026-05-04
1 दृष्टिकोण
अच्छे लोग, अच्छे काम
2026-05-04
1 दृष्टिकोण
मास्टर और शिष्यों के बीच
2026-05-04
1153 दृष्टिकोण
साँझा करें
साँझा करें
एम्बेड
इस समय शुरू करें
डाउनलोड
मोबाइल
मोबाइल
आईफ़ोन
एंड्रॉयड
मोबाइल ब्राउज़र में देखें
GO
GO
ऐप
QR कोड स्कैन करें, या डाउनलोड करने के लिए सही फोन सिस्टम चुनें
आईफ़ोन
एंड्रॉयड
Prompt
OK
डाउनलोड