अपने मन को व्यस्त रखें: संत किरपाल सिंह जी (शाकाहारी) द्वारा रचित 'किरपाल का प्रकाश' से चयनित अंश, 2 का भाग 22026-02-07ज्ञान की बातेंविवरणडाउनलोड Docxऔर पढो“आत्मा का प्रेम परमात्मा के साथ होना चाहिए। प्रेम तुम्हारे भीतर ही है। अंतरमुखी होकर, तुम उनसे संपर्क कर पाते हो। जब गुरु तुम्हें उनसे संपर्क करा देते हैं, तो तुम्हें दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ना होता है।”